मजदूरी के लिए मजदूरों ने थामा नक्सलियों का हाथ
16-Apr-2016 07:09 AM 1234791

लगभग एक साल तक शांत रहे बालाघाट में 7 अप्रैल को पुलिस और नक्सलियों बीच हुई मुठभेड़ में गूंजी गोलियों की आवाज से जिले के कई गांवों में दहशत का माहौल है। इस मुठभेड़ के बाद पुलिस ने जिले के नक्सल प्रभावित गांवों पथरी, सोनगुड्डा, नौवी, बिठाली, अरोड़ी, डाबरी, राशिमेटा, दुल्लापुर, दरकसा आदि में सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि मुठभेड़ के बाद नक्सली जंगलों में गायब हो गए हैं, लेकिन प्रशासन सोच में है कि आखिर ये नक्सली फिर से कैसे सक्रिय हो गए।
दरअसल जिले में नक्सली स्वयं नहीं बल्कि ग्रामीणों की गुहार पर सक्रिय हुए हैं। बताया जाता है कि मनरेगा के तहत काम करने के बाद भी मजदूरी नहीं मिलने से परेशान मजदूरों ने नक्सलियों से गुहार लगाई है कि वे सरपंचों से उनकी मजदूरी दिलाए। लोगों का साथ मिलने के बाद नक्सलियों द्वारा भुगतान के लिए सरपंचों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि नक्सलियों ने करीब दर्जनभर गांवों के सरपंचों के साथ पंचायत कर जल्द से जल्द मजदूरी देने की हिदायत दी है। इससे सरपंचों में खौफ का माहौल है।
जानकारी के अनुसार नक्सल प्रभावित दक्षिण बैहर क्षेत्र के ग्राम पंचायतों में पिछले 7-8 माह से मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाया है। जिसके कारण इस वर्ष ग्रामीणों ने वर्ष में एक बार मनाए जाने वाला होली पर्व ही नहीं मना सकें। जिसके कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन को लेकर काफी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में अनेक बार मजदूरी भुगतान किए जाने की मांग की गई, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिसके कारण इस तरह की समस्या बनी हुई है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014-15 में केन्द्र सरकार ने मनरेगा के तहत राज्यों को पर्याप्त फंड मुहैया नहीं कराया था। इस कारण मध्यप्रदेश के जिलों में भी मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं हो सका है। अब 2015-16 का सारा धन खत्म होने के बाद भी केंद्र सरकार पर मनरेगा के तहत विभिन्न राज्यों का करीब 12000 करोड़ रुपया बकाया है। इसमें मध्यप्रदेश का 480 करोड़ रुपए है। यह रकम अभी तक राज्य सरकार को मिली नहीं है। इस रकम की भरपाई सहित अन्य कार्यों के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर 4000 हजार करोड़ रुपए की मांग की है। जब तक यह रकम नहीं आ जाती प्रदेश में मजदूरी को लेकर मारा-मारी जारी रहेगी।
लेकिन यह बात न तो शासन और न ही प्रशासन को मालूम था कि अब मजदूरों की मजदूरी दिलाने के लिए नक्सली भी मैदान में उतर जाएंगे। जिस तरह बालाघाट में नक्सलियों ने मजदूरी के लिए सरपंचों की पंचायत लगाकर धमकी दी है उससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि चंबल और विन्ध्य क्षेत्र में डकैत भी इसी नक्शे कदम पर चल सकते हैं। बालाघाट कलेक्टर भरत यादव कहते हैं कि जिले में मजदूरी का भुगतान शेष है, यह बात सही हैं। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे ही राशि आबंटित हो जाएगी, वैसे ही भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन क्षेत्र में फिर से नक्सलियों की सक्रियता चिंता का विषय है।
उधर सोनगुड्डा के पूर्व सरपंच तातुसिंह धुर्वे का कहना है कि ग्रामीणों को मनरेगा के तहत भुगतान नहीं मिलने की वजह से इस वर्ष होली पर्व नहीं मना पाए हैं। ग्रामीणों ने इसी बात को लेकर नक्सलियों से शिकायत की है। जिसके आधार पर नक्सलियों ने सरपंचों से भुगतान को लेकर चर्चा की है। सोनगुड्डा पंचायत में करीब 10 लाख रुपए का भुगतान शेष हैं। समय पर भुगतान नहीं होने के कारण ग्रामीण पंचायत के कार्यों पर अब विश्वास नहीं कर रहे हैं। अधिकांश ग्रामीण रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके हैं। दरअसल जिस मनरेगा को सरकार गरीबों की स्थिति सुधारने में सहायक मान रही है वह अब सरकार के लिए सिरदर्द बन गई है।
गांवों में पसरा सन्नाटा
नक्सलियों और पुलिस की मुठभेड़ के बाद कई गांवों में सन्नाटा पसर गया है। गांव वालों को डर सता रहा है कि अब पुलिस की कार्रवाई उनके खिलाफ हो सकती है। उधर नक्सलियों से धमकी मिलने के बाद भी प्रशासन द्वारा संबंधित सरपंचों को कोई भी सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है। सरपंचों में मजदूरी भुगतान और नक्सलियों द्वारा दी गई धमकी को लेकर काफी खौफ बना हुआ है। हालांकि, एसपी गौरव तिवारी का कहना है कि सरपंचों की सुरक्षा को लेकर पुलिस सतर्क है। लेकिन सरपंचों द्वारा इस घटना के बाद सुरक्षा के लिए कोई भी आवेदन नहीं दिया गया है।
-विशाल गर्ग

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